Sunday, March 13, 2022

RAGHUPATI RAGHAV RAJA RAM - Original

 


इतनी शक्ति हमें दे न दाता





इतनी शक्ति हमें देना दाता
मनका विश्वास कमज़ोर हो ना
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे
भूलकर भी कोई भूल हो ना...

हर तरफ़ ज़ुल्म है बेबसी है
सहमा-सहमा-सा हर आदमी है
पाप का बोझ बढ़ता ही जाये
जाने कैसे ये धरती थमी है
बोझ ममता का तू ये उठा ले
तेरी रचना क ये अन्त हो ना...
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे
भूलकर भी कोई भूल हो ना...



दूर अज्ञान के हो अन्धेरे
तू हमें ज्ञान की रौशनी दे
हर बुराई से बचके रहें हम
जितनी भी दे, भली ज़िन्दगी दे
बैर हो ना किसीका किसीसे
भावना मन में बदले की हो ना...
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे
भूलकर भी कोई भूल हो ना...

हम न सोचें हमें क्या मिला है
हम ये सोचें किया क्या है अर्पण
फूल खुशियों के बाटें सभी को
सबका जीवन ही बन जाये मधुबन
अपनी करुणा को जब तू बहा दे
करदे पावन हर इक मन का कोना...
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे
भूलकर भी कोई भूल हो ना...

हम अन्धेरे में हैं रौशनी दे,
खो ना दे खुद को ही दुश्मनी से,
हम सज़ा पाये अपने किये की,
मौत भी हो तो सह ले खुशी से,
कल जो गुज़रा है फिरसे ना गुज़रे,
आनेवाला वो कल ऐसा हो ना...
हम चले नेक रास्ते पे हमसे,
भुलकर भी कोई भूल हो ना...

इतनी शक्ति हमें दे ना दाता,
मनका विश्वास कमज़ोर हो ना...

Tuesday, April 27, 2021

Khate Bhi Ram Kaho Pite Bhi Ram Kaho


 


Khate Bhi Ram Kaho Pite Bhi Ram Kaho Sote Bhi Ram Kaho Ram Ram Ram

Bolo Raaam Ram Ram Raaaam Ram Ram Raaam Ram Ram Ram Ram Ram


Chalte Bhi Ram Kaho Daudte Bhi Ram Kaho Girte Bhi Ram Kaho Ram Ram Ram

Bolo Raaam Ram Ram Raaaam Ram Ram Raaam Ram Ram Ram Ram Ram


Sote Bhi Ram Kaho Jagte Bhi Ram Kaho Sapne Bhi Ram Kaho Ram Ram Ram

Bolo Raaam Ram Ram Raaaam Ram Ram Raaam Ram Ram Ram Ram Ram


Uthte Bhi Ram Kaho Baithte Bhi Ram Kaho Lethte Bhi Ram Kaho Ram Ram Ram

Bolo Raaam Ram Ram Raaaam Ram Ram Raaam Ram Ram Ram Ram Ram


Padte Bhi Ram Kaho Likte Be Ram Kaho Bhulte Bhi Ram Kaho Ram Ram Ram

Bolo Raaam Ram Ram Raaaam Ram Ram Raaam Ram Ram Ram Ram Ram


Bolo Raaam Ram Ram Raaaam Ram Ram Raaam Ram Ram Ram Ram Ram

Monday, February 1, 2021

आओ हम सब मिलकर गाएं, जग जननी की गान ॥




आओ हम सब मिलकर गाएं, जग जननी की गान ॥ध्रु॥

स्वर्ण-मुकुट मस्तक पर भाता,
चरणों में सागर लहराता,
मलय पवन जिसका गुण गाता,
सबसे न्यारा, जग का तारा, भारत देश महान ॥१॥

यहीं कृष्ण ने जन्म लिया था,
दुष्टों का संहार किया था,
जग को नव सन्देश दिया था,
लहर-लहर यमुना भी गाती, सुन लो इसके गान ॥२॥

चन्द्रगुप्त की जन्मभूमि यह,
राणा की भी मातृभूमि यह,
वीर शिवा की कर्मभूमि यह,
कोटि-कोटि वीरों ने इस पर, प्राण किए बलिदान ॥३॥

मातृभूमि हम सबकी प्यारी,
जगती में इसकी छवि न्यारी,
कोटि स्वर्ग इस पर बलिहारी,
इसकी रक्षा-हित हम कर दें, अर्पित तन-मन-प्राण ॥४॥

निर्माणों के पावन युग में हम चरित्र निर्माण न भूलें !




निर्माणों के पावन युग में



निर्माणों के पावन युग में हम चरित्र निर्माण न भूलें !
स्वार्थ साधना की आंधी में वसुधा का कल्याण न भूलें !!

माना अगम अगाध सिंधु है संघर्षों का पार नहीं है
किन्तु डूबना मझधारों में साहस को स्विकार नही है
जटिल समस्या सुलझाने को नूतन अनुसन्धान न भूलें !!

शील विनय आदर्श श्रेष्ठता तार बिना झंकार नही है
शिक्षा क्या स्वर साध सकेगी यदि नैतीक आधार नहीं है
कीर्ति कौमुदी की गरिमा में संस्कृति का सम्मान न भूले !!

आविष्कारों की कृतियों में यदि मानव का प्यार नही है
सृजनहीन विज्ञान व्यर्थ है प्राणी का उपकार नही है
भौतिकता के उत्थानों में जीवन का उत्थान न भूलें !!

जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान है




जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान है
जिसके वास्ते ये तन है मन है और प्राण है ॥धृ॥



ईसके कण कण में लिखा रामकृष्ण नाम है
हुतात्माओंके रुधिरसे भूमि सष्य श्याम है
धर्म का ये धाम है सदा ईसे प्रणाम है
स्वतंत्र है यह धरा स्वतंत्र आसमान है ॥१॥

ईसकी आन पर अगर जो बात कोई आ पडे
ईसके सामने जो जुल्म के पहाड हो खडे
शत्रु सब जहान हो विरुद्ध आसमान हो
मुकाबला करेंगे जब तक जान मे ये जान है ॥२॥

ईसकी गोद मे हजारो गंगा यमुना झूमती
ईसके पर्वतोंकी चोटियाँ गगन को चूमती
भूमि यह महान है निराली ईसकी शान है
ईसकी जयपताक पर लिखा विजय निशान है ॥३॥

चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है






चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु ||



हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है
जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है
जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है || 1 ||

जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है
त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है
ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है || 2 ||

जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है
जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है
जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है || 3 ||